विक्रमी संवत् के दिन नव वर्ष का नया दिन मनाया जाता है। हज़ारों वर्ष गुज़र गये राजा विक्रमादित्य को गये हुए, परन्तु उसके नाम से हर वर्ष सम्वत् मनाया जाता है। किसलिए और किस कारण सम्वत् मनाया जाता है? इस अवधि के मध्य हज़ारों लाखों इन्सान इस दुनिया में आये और चले गये। उस समय में बड़े-बड़े राजा, अमीर, धनाढ¬, निर्धन सभी हुए परन्तु प्रत्येक को स्मरण नहीं किया जाता। याद किसकी होती है? जो अपना नाम अमर कर जाता है। अमर पदवी किससे मिलती है? अमर वस्तु को दिल में बसाने से। अमर वस्तु से नेह लगाने से ही अमर पदवी मिलती है। तभी वह अमर जीवन कहलाता है। आरिफ़ों का क़ौल है----
।। शेअर ।।
बस नाम वर बज़ेरे ज़मीं दफ़न करदा अन्द ।
कज़ हस्ती अश बरूये ज़मीं यक निशां नमाँद ।।
ज़िन्दां अस्त नामे फरोख नौशेरवाँ बा अदल ।
अगरचे बसे गुज़श्त नौशेरवाँ ना माँद ।।
बड़े-बड़े राजा महाराजा गुज़र गये, उनका दुनिया में कोई नामोनिशान भी नहीं है। परन्तु हज़ारों वर्ष गुज़र गये, एक नौशेरवां बादशाह का नाम ज़िन्दा है, विक्रमादित्य का नाम अमर है, किस कारण से दोनों का नाम अमर है? उन्होंने परोपकार के अनेकानेक कार्य किये, भक्ति की कमाई की, सच्चे नाम को दिल में बसाया जोकि नित्य, सत् और अमर है। इन्सान जिसका ध्यान करता है, जिसे दिल में स्थान देता है वही रूप बन जाता है, उसे वही पदवी मिल जाती है।
इन्सान क्यों जन्म-मरण के चक्कर में पड़ता है? क्यों चौरासी लाख योनियां भोगता है? वह न·ार चीज़ों को दिल में बसाता है, उसमें मन लगाता है। क्योंकि वे स्वयं न·ार एवं क्षणभंगुर हैं, इसीलिए उनका भी नाश हो जाता है और इन्सान का भी नामो-निशान मिट जाता है, इसीलिए ही जन्म-मरण के चक्कर में पड़ा रहता है। सौभाग्य एवं पुण्य संस्कारों से यदि सत्पुरुषों की संगति मिल जाती है तो इन्सान के दिल से मिथ्या पदार्थों का मोह, न·ार सामानों की आसक्ति तथा उनके ख़्याल हटकर सत्, चित्, आनन्द और अमर वस्तु का ख्याल दिल में बस जाता है। इसी से अमर जीवन मिलता है, इसी से अमर पदवी को पाता है।
अब जैसे आपने विक्रमी संवत् का नया वर्ष मनाया है। कईयों के दिल में ख्याल उठता होगा कि उसका नाम अमर क्यों है, और किसी का क्यों नहीं हो सकता? आपने कितने इतिहास पढ़े होंगे। सन्त, महापुरुष, भक्त------जिन्होंने भी मालिक की भक्ति और नाम में दिल लगाया, उनके ही जीवन और नाम अमर हो गये। उन्होंने अमर पदवी पाई।
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