Thursday, January 21, 2016

जीवन स्वपन वत

एक भिखारी जो दर दर की भीख माँगने वाला सपने में अगर राजा भी हो जाये और सपने में प्राप्त सुख वैभव को देख कर प्रसन्न होता रहे या कोई राजा सपने में हाथ में भिक्षा पात्र लिये दर दर की भीख माँगता हुआ दुःखी हो रहा हो लेकिन दोनों के नींद से जाग जाने पर कोई अन्तर नहीं पड़ता भिखारी भिखारी ही रहता है राजा राजा ही रहता है उन्हें कुछ भी हानि लाभ नहीं होता है। एक गरीब व्यक्ति सपने में अमीर हो गया और सपने में ही अपनी कार बेचना चाहता है उस कार का मोल भाव करने लगा खरीदार कह रहा है कि में इसके एक लाख दृूँगा लेकिन वह कहता है कि डेढ़ लाख लूँगा इसी तकरार में उसकी नींद खुल जाती है देखता है,न कार है,न खरीदार,न लाख है न डेढ़ लाख। उसने सोचा मैंने बड़ी गल्ती की लाख मिल ही रहा था वह भी गया। दोबारा आँखें बन्द करके कहता है ला एक लाख ही दे दे। न उसे एक लाख ही मिलना है न दो लाख क्योंकि ये तो सपना है। महापुरुष फरमाते हैं कि जो रचना देखने में आती है ये सब सपना है।
     मोह निशा जग सोवन हारा। देखहिं स्वपन विविध प्रकारा।।
ये सारा संसार ही मोह की नींद में सो रहा है और विभिन्न प्रकार के स्वपन देख रहा है कोई मान प्रतिष्ठा प्राप्त करने के,कोई सुख ऐश्वर्य के स्वपन देख रहा है कोई धनी बनने के  स्वपन देख रहा है कोई राज्य पदवी को प्राप्त करने के स्वपन देख रहा है। महापुरुष फरमाते हैं कि चाहे कोई झुग्गी झोंपड़ी में रह रहा है या भव्य महलों में, चाहे कोई पैसे पैसे के लिये तरस रहा है या किसी ने धन केअम्बार लगा रखे हों। चाहे कोई कर्ज़दार बना हुआ है या साहूकार बना हुआ है। हैं ये सब सपने के दृश्य ही। रोज़ाना जो हम नींद करते हैं ये ज़रा सपना छोटा है पाँच छः घन्टे का है आठ नौ घन्टे का है और जो जीवन का सपना है ज़रा लम्बा है पचास साठ वर्ष,अस्सी नब्बे वर्ष का है फर्क इतना ही है बस। हैं दोनों सपने ही। असत्य हैं क्योंकि रोज़ाना की नींद में व्यक्ति जब स्वपन की रचना को देख रहा होता है प्रसन्न या अप्रसन्न हो रहा होता है उस समय ये रचना उसे सत्य प्रतीत होती है और संसार की तरफ से बेखबर होने के कारण दुनियाँ का उसके लिये कोई अस्तित्व नहीं होता वह उसके लिये असत्य होती है और जब इस नींद से जाग कर इन बाहरी नेत्रों से संसार के दृश्य देख रहा है और संसार के कार्य व्यवहार में लग जाता है तो सपने की रचना उसके लिये असत्य हो जाती है लेकिन अन्दर के नेत्र बन्द होने के कारण ये संसार के दृश्य भी सपने ही हैं। जीव के पिछले जन्म जो बीत गये हैं क्या वो सपना नही हो गये? इस जन्म के जो वर्ष बीत चुके हैं क्या वो सपना नहीं हो गया? कल जो बीत गया आज वो सपना हो गया है आज जो बीत जायेगा कल सपना हो जायेगा। इसी तरह ये सारे जीवन की कार्यवाही सपना हो जाती है। कहाँ हैं वे मित्र जो पिछले जन्म में थे? कहाँ हैं वे मकान? कहाँ हैं वे बच्चे, परिवार? कहां गई वो
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दुनियाँ जो पिछले जन्म में थी? कहाँ गया वह सब, जिसको हमने इतना सत्य मान रखा था कि वह है? कहाँ गर्इं वे चिन्ताएँ जिनके लिए हम रात भर सोए नहीं थे? कहां गये वे सुख जिनके लिये हमने आकाँक्षायें की थीं? कहां गया वह सब जिसके लिए हम दुःखी, पीड़ित, परेशान हुए थे? अगर पिछला जन्म याद आ जाये और सत्तर वर्ष आप जिए हों, तो उन सत्तर वर्षों में जो देखा गया था वह एक सपना मालूम पड़ेगा या सत्य? एक सपना ही मालूम पड़ेगा, आया और गया।

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