Monday, January 4, 2016


 धन होते हुए भी इलाज न कराया

एक डाक्टर थे। मिलटरी के रिटायर्ड डाक्टर थे। उन्होने शादी नहीं की। मिलिटरी में चोट लग जाने की वजह से वे समय के पहले रिटायर हुए। तो उनको कोई मिलिटरी से पेंशन मिलती थी, काफी अच्छी। कई लाख रुपए का बंगला था, और कोई दो लाख रुपया उनके बैंक में जमा था। लेकिन उनका कुल भोजन चाय और पापड़। बस वे उसी पर जीते थे। बीमार पड़े हार्ट अटैक हुआ, और उनकी बोली बंद हो गई। तो उनका तो कोई भी नहीं था। आधे मकान को उन्होने किराए पे दे रखा था। तो किराएदार ने मुझे आ के कहा, मैं सामने ही रहता था कि डाक्टर साहिब का मुंह बन्द हो गया है, वे बोल नहीं पा रहे हैं। और लगता है बहुत संकट की अवस्था में हैं। तो मैं गया तो मैने उनसे कहा कि डाक्टर को बुलाऊँ? तो उन्होने इशारा किया कि रुपए कौन देगा? तो मैने कहा, उनकी आप चिंता न करें। डाक्टर को बुलाया। डाक्टर ने कहा, यह तो ज्यादा संकट की अवस्था है, और इन्हें इसी वक्त अस्पताल ले जाना पड़ेगा। तो एम्बुलेंस बुलवाई। एम्बुलेंस में चढ़ने के पहले उन्होने मुझसे कहा कि ताला लगा के चाबी मुझे दे दें। तो सामने उनके उन्होने ताला लगाया। बोलती बंद है, और घंटे-भर बाद वे मर गए। लेकिन उन्होने चाबी सामने ले के रखवा ली। और जब वे मर गए तो उनकी जेब में पांच हज़ार रुपये थे। और मुझसे उन्होने कहा कि डाक्टर की फीस कौन देगा। बोल भी नहीं सकते थे।
    बाड़ खेत बन जाती है। धन आवश्यक है, लेकिन धन को ही इकट्ठे करते रहना पागलपन है। मकान ज़रूरी है, लेकिन जीवन भर मकान बनाते रहना, और मकान में रहने की सुविधा ही न मिल पाए, समय ही न मिल पाए और जीवन गंवा देना पागलपन है। कपड़े चाहिए, लेकिन एक आदमी कपड़े ही इकट्ठे करता रहे, कपड़ों में ही खो जाए, सुरक्षा के उपाय खोज सकता है जीवन को बचाने की हज़ार विधियांं बना सकता है। सब आवश्यक है। लेकिन यही जीवन नहीं है। द्वार पर आप एक द्वारपाल को खड़ा कर देते हैं, ज़रूरी है। लेकिन आप खुद ही द्वारपाल की तरह खड़े रहे, तो आप पागल हैं। फिर किसकी रक्षा कर रहें हैं? लोग अकसर जीवन की व्यवस्था जुटाने में ही जीवन को गंवा देते हैं। जीने का तो मौका ही नहीं आ पाता। तुम रोज़ टालते जाते हो कि जिएंगे कल, इंतज़ाम पहले कर लें। इंतज़ाम कभी पूरा नहीं होगा। जियोगे कैसे। ध्यान रहे, जिसे जीना है, उसे अधूरे इंतज़ाम में जीने की कला खोजनी पड़ती है। क्योंकि इंतज़ाम कभी पूरा नहीं होता। क्योंकि जीवन छोटा है मन की कामनाओं का कोई अंत नहीं है।

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